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क्या है बॉब्स


बॉब्स के जरिए डॉयचे वेले 2004 से एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है जो ऐसे ब्लॉगर, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को सम्मानित करती है जो इंटरनेट से जुड़ कर अभिव्यक्ति की आजादी और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं.

बॉब्स दुनिया की एकमात्र ऐसी प्रतियोगिता है जो भाषा और सांस्कृतिक की बाधाओं को पार करते हुए इंटरनेट की दुनिया में रचनात्मकता और साहस का उदाहरण दे रहे है प्रोजेक्ट्स को सम्मानित करती है.

बॉब्स प्रतियोगिता में इन भाषाओं की वेबसाइटें हिस्सा ले सकती हैं: हिन्दी, अरबी, बंगाली, चीनी, जर्मन, अंग्रेजी, फ्रेंच, इंडोनेशियाई, फारसी, पुर्तगाली, रूसी, स्पेनिश, तुर्की और यूक्रेनी.

2015 में पहली बार डॉयचे वेले “फ्रीडम ऑफ स्पीच” पुरस्कार देने जा रहा है.

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय जूरी चार श्रेणियों “सोशल चेंज”, “टेक फॉर गुड”, “आर्ट्स एंड कल्चर” और “सिटिजन जर्नलिज्म” में विजेताओं का चयन करेगी. इंटरनेट यूजर सभी 18 श्रेणियों में ऑनलाइन वोटिंग कर सकते हैं. इन्हीं वोटों के बिनाह पर पीपल्स चॉइस अवॉर्ड दिए जाएंगे.

पिछले सालों के विजेताओं के नाम इस प्रकार हैं: योआनी सांखेज (क्यूबा), लीना बेन महेनी (ट्यूनीशिया), उषाहिदी (केनिया), द सनलाइट फाउंडेशन (अमेरिका), ली चेनपेंग (चीन) और अला अब्द एल फताह (मिस्र).

पिछले सालों के जूरी सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं: माइकल आंटी, इसाक माओ, रुस्तम अदागामोव, एरिक हेरस्मन, रोसाना हेर्मन, लोइच ले मेउर, मुजी मेई, अमर अब्दुलहामिद, बुदि पुत्रा, मुस्तफा नैयम, शाहिदुल आलम, एंड्रयू बैरन और आई वेईवेई.

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2014 पुरस्कार समारोह

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